उर्दू क़वायद (व्याकरण) मेंइज़ाफ़ततथाअत्फ़का एक विशेष महत्त्व है, ये दो शब्दों के जोड़ने का एक तरीका है | इस ब्लॉग में इसे ही समझने समझाने की कोशिश की है | इस ब्लॉग में साझा की जा रही जानकारी मैंने अपने पिता जी के पुराने नोट्स से हासिल की है | आपसे गुज़ारिश है इस सन्दर्भ में यदि आप कोई सुझाव जानकारी देना चाहे तो स्वागत है |

अमित हर्ष . . . . . . . . . . . फेसबुक लिंक = https://www.facebook.com/amit.harsh

Friday, June 27, 2014



:: इज़ाफ़त ::

उर्दू, अरबी फ़ारसी में किन्ही दो शब्दों कोज़ेरयानीके जरिये जोड़ा जा सकता है प्रक्रिया तरकीब कोइज़ाफ़त  कहते है, जैसे : सूरत--यार, दिल--नादाँ, गुल--तर, मुग़ल--आज़म आदि |

इस प्रक्रिया तरकीब को अमूमनकी’ ‘के’ ‘कामेंआदि के इस्तेमाल से बचने के लिए किया जाता है जैसे :

ज़ेर--आस्तीन
: आस्तीन के नीचे
तबादला--ख़याल
: ख्यालों का तबादला, विचारों का आदान-प्रदान, बातचीत 
नक़ाब--रुख़
: चेहरे का नक़ाब
मौसम--गुल
: गुल का मौसम, फूलों की ऋतु
शरीक--हयात
: हयात में शरीक (पत्नीके लिए प्रयोग की जाती है येइज़ाफ़त)
सूरत--यार
: यार की सूरत

परन्तु यदिइज़ाफ़तमें जोड़े जाने वाले दो शब्दों में पहलासंज्ञा’ (Noun, इस्म) हैं और दूसराविशेषण’ (Adjective, तख़सीस, ख़ुसूसियत) है तबविशेषणवाले शब्द कोसंज्ञावाले शब्द के पहले रख देते से मतलब निकल आता है जैसे :

दिल--नादाँ
: नादान दिल
गुल--तर
: तर गुल
मुग़ल--आज़म
: आज़म मुग़ल, महान मुग़ल (बादशाह अकबर को दी गई एक उपाधि)

यदिइज़ाफ़तमें पहला शब्द आकारांत होता है जैसेवादातो उसमेकी मात्रा हटा कर उसके आगेजोड़ देते है, जैसे :

वाद--करम 
: करम का वादा

इसी तरह अगर पहले शब्द के आख़िर में दीर्धकी मात्रा हो तो उसे हटाकर छोटीकी मात्रा लगा कर आगेजोड़ देते है जैसे :

बेचारगि--इश्क़ 
: इश्क़ की बेचारगी 
मस्ति--शबाब
: शबाब की मस्ती

अमूमनइज़ाफ़तमें दूसरे शब्द के बादका’, ‘कीयाकेलगा कर पहले वाला शब्द लिखने से सही मतलब निकलता है, परन्तु यहाँ भी कुछ अपवाद है जैसे :

गर्दिश--दौरां 
: गर्दिश का दौर || विपत्ति का समय   

नोट : यहाँदौर की गर्दिशमतलब निकालना सही नहीं होगा |

:: अत्फ़ ::

जब दो शब्दों को और से जोड़ना होता है तो उसके लिए जो तरकीब इस्तेमाल की जाती है उसेअत्फ़कहते है जैसे :

गुल--बुलबुल
: गुल और बुलबुल
शाम--सहर 
: शाम और सहर
शब--रोज़
: शब् और रोज़ 
रात--दिन
: रात और दिन

यहाँ पर भी अगर पहला शब्द आकारांत होता है जैसेगुंचातो उसमेकी मात्रा हटा कर उसके आगेजोड़ देते है, जैसे :

गुंच--गुल
: गुंचा और गुल

इसी तरह अगर पहले शब्द के आख़िर में दीर्धकी मात्रा हो तो उसे हटाकर छोटीकी मात्रा लगा कर आगेजोड़ देते है जैसे :

सादगि--शोख़ी
: सादगी और शोख़ी
 
:: अत्फ़-ओ-इज़ाफ़त ::

कई शब्दों को एक साथअत्फ़ औरइज़ाफ़तदोनों के जरिये भी जोड़ा जाता है, जैसे :

क़ैद--हयात--बंद--ग़म
: हयात की क़ैद और ग़म का बंद
  यानी जीवन की क़ैद और दुःख का बंधन